ज्योतिष में चंद्र ग्रह

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ज्योतिष में ग्रहों का महत्वपूर्ण स्थान है।सात ग्रह- सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र,शनि व दो छाया ग्रह राहु व केतु ग्रह

चंद्रमा ग्रह
 
ज्योतिष में चंद्रमा ग्रह का महत्वपूर्ण स्थान है। यह एक स्त्री जाति का श्वेत वर्ण व जलीय ग्रह है।


चंद्रमा जातक के मन का प्रतीक है। जातक की कुंडली में चंद्रमा जातक की आयु को दर्शाता है।


कृष्ण पक्ष की षष्ठी से शुक्ल पक्ष की दशमी तक चंद्रमा क्षीण रहता है। इस समय चंद्रमा को पाप ग्रह माना जाता है। शुक्ल पक्ष की दशमी से कृष्ण पक्ष की पंचमी तक चंद्रमा ग्रह पूर्ण ज्योतिवान रहता है। इस अवधि में इसे शुभ ग्रह व बली माना जाता है।


चंद्रमा चतुर्थ भाव में अपना पूर्ण फल प्रदान करता है।


चंद्रमा कर्क राशि का स्वामी है अतः यदि यह कर्क राशि में स्थित हो तो उसे स्वगृही कहा जाता है। परंतु यदि चंद्रमा वृष राशि में स्थित हो तो वह  उच्च का कहलाता है।


कुंडली में चंद्रमा जातक की आंख का प्रतिनिधित्व करता है।चंद्रमा को ज्योतिष में माता का प्रतीक माना जाता है।


ज्योतिष में चंद्रमा ग्रह का महत्वपूर्ण स्थान


चंद्रमा को ज्योतिष में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है चंद्रमा गोचर का आधार भी है क्योंकि एक तो यह मन का प्रतीक है और दूसरा यह एक शीघ्रगामी ग्रह है।


प्रतिदिन की गतिविधियों में जो भी परिवर्तन पाया जाता है  इस परिवर्तन का आधार चंद्रमा को ही माना जाता है।


जन्म के समय जातक का चंद्रमा जिस राशि में होता है वही जातक की राशि, जन्म राशि कहलाती है।


जिस जातक की कुंडली में चंद्रमा नीच का होता है या अशुभ स्थिति में होता है उसे माता का सुख प्राप्त नहीं होता या माता होने पर भी उनसे मनमुटाव रहता है।


चंद्रमा एक शीघ्रगामी ग्रह है चंद्रमा एक राशि को लगभग सवा 2 दिन में पार कर लेता है।


और 12 राशियों को पार करने में चंद्रमा को लगभग 27 से 28 दिन लगते हैं।


चंद्रमा की स्थिति के अनुसार ही जातक की जन्म कुंडली में उसके नक्षत्र का निर्धारण होता है जिसे जन्म नक्षत्र कहा जाता है।


चंद्रमा 12 राशियों में भ्रमण करता हुआ 27 नक्षत्रों से होकर गुजरता है।


एक राशि में चंद्रमा के लगभग सवा दो नक्षत्र पढ़ते हैं ।


अशुभ चंद्रमा का प्रभाव


अशुभ चंद्रमा का प्रभाव जातक की कुंडली में चंद्रमा अशुभ होने पर जातक को मानसिक रोग व कफ संबंधी रोग हो सकता है।


यदि जातक को आंखों से संबन्धित कोई परेशानी है तो उसे चंद्रमा के उपाय करने चाहिए।

ऐसे जातक का मनोबल बहुत ही कमजोर होता है।

ऐसे जातक के मित्र बहुत कम होते हैं। यह लोग हमेशा अकेलापन सा महसूस करते है।

आप भी चंद्रमा से संबंधित किसी परेशानी का सामना कर रहे है तो आपको निम्नलिखित उपाय करने चाहिए।

1.    यदि आपकी कुंडली में चंद्रमा खराब हो तो चांदी की कोई भी ठोस वस्तु अपने पास रखें।
2.    दूध का दान करें मुख्यता सोमवार के दिन शिवलिंग पर दूध चढ़ाएं।
3.    मानसिक परेशानी होने पर नहाने के पानी में थोड़ा कच्चा दूध डालकर नहाए।
4.    यदि जातक के रिश्ते अपनी मां के साथ ज्यादा खराब है। तो अपनी मां से कोई चांदी की वस्तु जैसे चेन ,पायल, अंगूठी लेकर धारण करने के रिश्ते में सुधार होगा।
Acharya Rakhi