मकर संक्रांति 2022

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  • 9th Jan 2022

मकर संक्रांति 2022

मकर संक्रांति: 14  जनवरी 2022  शुक्रवार 

इस वर्ष मकर संक्रांति का पर्व 14 जनवरी 2022 दिन शुक्रवार को मनाया जाएगा।

 

क्या है मकर संक्रांति?

जब सूर्य या कोई भी ग्रह एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करता है तो उसे संक्रांति कहा जाता है। मकर संक्रांति पर्व भगवान सूर्य से जुड़ा है।

ऐसी मान्यता है कि इस दिन सूर्य अपने पुत्र शनि देव से पहले की नाराजगी भुलाकर उनके घर गए थे। मकर संक्रांति भगवान सूर्य के दक्षिणायन से उत्तरायण होने का संधि काल है। सूर्य के उत्तरायण काल से ही विभिन्न प्रकार के शुभ और मांगलिक कार्य किए जाते हैं।

सूर्य के उत्तरायण होने का सभी राशियों पर भी गहरा प्रभाव पड़ता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार उत्तरायण सूर्य आराधना मात्र से ही कुंडली में ग्रहों की हर प्रकार की प्रतिकूलता समाप्त हो जाती है।


मकर संक्रांति का महत्व

14 जनवरी 2022 को सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को प्रत्यक्ष देव कहने के साथ-साथ नवग्रहों का स्वामी भी माना जाता है। साल में सूर्य अपनी नियमित गति से विभिन्न 12 राशियों में गोचर करते हैं। इस प्रकार राशि परिवर्तन करने के कारण साल में 12 संक्रांति तिथियां पड़ती है। इन सभी में मकर संक्रांति अति महत्वपूर्ण है।

कहते हैं इस दिन से ही सूर्य के उत्तरायण होने के कारण सर्दी में कमी आने लगती है। इसके साथ ही बसंत ऋतु का आगमन भी प्रारंभ हो जाता है। दिन लंबे और रातें छोटी होने लगती हैं महाभारत के अनुसार इसी शुभ दिन भीष्म पितामह ने अपनी देह का त्याग किया था।

 

मकर संक्रांति: दिन और समय - शुभ मुहूर्त

14 जनवरी 2022 शुक्रवार को शुक्ल के बाद ब्रह्म योग रहेगा। इसके अतिरिक्त आनंद आदि योग तथा रोहिणी नक्षत्र भी रहेगा। शुक्रवार होने के कारण भी दिन शुभ है।

 

ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 5:38 से 6:26 तक

 पुण्य काल :दोपहर 2:43 से शाम 5:45 तक(अवधि 3 घंटे 2 मिनट)

 अभिजीत मुहूर्त : दोपहर 12:14 से 12:57 तक 

अमृत काल : शाम 4:40 से 6:29 तक

 

मकर संक्रांति: क्या करें/ क्या ना करें?

क्या करें मकर संक्रांति पर?

स्नान: इस दिन तीर्थराज प्रयाग और गंगासागर में स्नान को महा स्नान कहा गया है। इसके अतिरिक्त किसी भी पवित्र नदी या सरोवर में स्नान करना पुण्य कार्य माना जाता है। कोरोना काल में ऐसा संभव ना होने पर घर में ही प्रातः स्नानादि से निवृत्त हो जाएं।

पूजा-पाठ स्नानादि से निवृत्त होकर पूजा आराधना आदि करने का शुभ फल प्राप्त होता है। आदित्य हृदय स्त्रोत्र, पुरुष सूक्त, नारायण कवच आदि का पाठ करना मकर संक्रांति पर अति उत्तम है।

मकर संक्रांति: क्या दान करे : मकर संक्रांति के दिन वस्त्र, चावल, चिड़वा, उड़द, तिल, गुड़, ऊनी वस्त्र, कंबल, धन आदि दान करने का विशेष महत्व है। किसी भी प्रकार का दान स्नानादि से निवृत्त होकर ही करें।

उड़द तथा तिल का दान करने से शनि दोष से तथा कंबल का दान करने से है राहु के अशुभ प्रभाव से दूर रहते हैं।

 

मकर संक्रांति: क्या ना करें?

इस दिन लहसुन, मांस ,मदिरा, सिगरेट आदि का सेवन नहीं करना चाहिए।

किसी को भी किसी भी प्रकार के अपशब्द नहीं कहना चाहिए।

घर आए हुए भिक्षुक और गरीब को खाली हाथ विदा नहीं करना चाहिए। यथाशक्ति तथा यथा इच्छा उसे कुछ ना कुछ दान देकर ही विदा करें।

वस्त्र दान करते समय वस्त्र पुराने और फटे हुए नहीं होने चाहिए।

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